भारत का पहला ड्रोन–एआई आधारित कृत्रिम वर्षा प्रयोग जयपुर में शुरू
भारत ने तकनीकी नवाचार की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। राजस्थान के जयपुर स्थित रामगढ़ बांध क्षेत्र में भारत का पहला ड्रोन–एआई आधारित कृत्रिम वर्षा (Artificial Rain) प्रयोग शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य 129 साल पुराने जलाशय को पुनर्जीवित करना है, जो पिछले दो दशकों से सूखा पड़ा है और 1981 के बाद से कभी पूरी क्षमता तक नहीं भर पाया।
क्यों ज़रूरी है यह प्रयोग?
- रामगढ़ बांध जयपुर की प्रमुख जल आपूर्ति का स्रोत हुआ करता था।
- पिछले 20 वर्षों से यह बांध सूखा पड़ा है।
- जल संकट और मानसून की अनियमितता को देखते हुए तकनीक का सहारा लिया गया है।
कैसे काम करता है ड्रोन–एआई आधारित कृत्रिम वर्षा?
इस प्रोजेक्ट में एआई संचालित ड्रोन का उपयोग किया जाता है, जो बादलों की स्थिति, नमी और हवा की गति का डेटा इकट्ठा करते हैं। फिर ड्रोन विशेष रसायन जैसे सिल्वर आयोडाइड को बादलों में छोड़ते हैं, जिससे बारिश की संभावना बढ़ जाती है।
संभावित लाभ
- रामगढ़ बांध का पुनर्जीवन: जलाशय फिर से भरने की संभावना।
- जल संकट से राहत: जयपुर सहित आसपास के इलाकों को फायदा।
- कृषि को सहारा: बारिश से किसानों की सिंचाई आसान होगी।
- तकनीकी आत्मनिर्भरता: भारत को जल-संकट से निपटने में नई दिशा मिलेगी।
आगे की राह
यह प्रयोग अभी शुरुआती चरण में है। यदि यह सफल होता है, तो इसे राजस्थान और अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
यह प्रयोग राजस्थान के जयपुर स्थित रामगढ़ बांध क्षेत्र में शुरू हुआ है।
129 साल पुराने रामगढ़ जलाशय को पुनर्जीवित करना और जल संकट को कम करना।
ड्रोन बादलों में सिल्वर आयोडाइड जैसे रसायन छोड़ते हैं, जिससे बारिश की संभावना बढ़ती है।