बीबी फातिमा महिला स्वयं सहायता समूह ने जीता संयुक्त राष्ट्र का इक्वेटर पुरस्कार 2025
कर्नाटक के धारवाड़ ज़िले के कुंदगोल तालुक के तीर्थ गांव में स्थित बीबी फातिमा महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रतिष्ठित इक्वेटर पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार विश्व स्तर पर जैव-विविधता संरक्षण के "नोबेल पुरस्कार" के रूप में जाना जाता है।
इक्वेटर पुरस्कार क्या है?
इक्वेटर पुरस्कार संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा उन समुदायों और संगठनों को दिया जाता है, जो जैव-विविधता संरक्षण, सतत विकास और जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में उल्लेखनीय योगदान करते हैं। इसे पर्यावरण और जैव-विविधता क्षेत्र का सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक पुरस्कार माना जाता है।
बीबी फातिमा महिला स्वयं सहायता समूह की उपलब्धि
- ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व में यह समूह सतत खेती और जैव-विविधता संरक्षण में सक्रिय है।
- समूह ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सामुदायिक विकास में अहम भूमिका निभाई है।
- स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और महिला सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है।
इस सम्मान का महत्व
- अंतरराष्ट्रीय पहचान: भारतीय महिला समूह को वैश्विक मंच पर सम्मान।
- सामुदायिक विकास को बढ़ावा: ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रेरणा।
- जैव-विविधता संरक्षण: पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में योगदान।
- महिला सशक्तिकरण: ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व को वैश्विक मान्यता।
आगे की राह
बीबी फातिमा महिला स्वयं सहायता समूह की यह उपलब्धि न केवल कर्नाटक बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है। यह सफलता अन्य महिला समूहों और ग्रामीण संगठनों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है, जो सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
धारवाड़ ज़िले के तीर्थ गांव स्थित बीबी फातिमा महिला स्वयं सहायता समूह को यह पुरस्कार मिला।
यह पुरस्कार उन समुदायों और संगठनों को दिया जाता है जो जैव-विविधता संरक्षण और सतत विकास में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं।
क्योंकि यह पुरस्कार विश्व स्तर पर सबसे प्रतिष्ठित और सम्मानित पर्यावरणीय पुरस्कारों में से एक है।