प्रागैतिहासिक काल : एक विद्वत्तापूर्ण अध्ययन
प्रस्तावना
मानव इतिहास को समझने के लिए सबसे पहले हमें उस कालखंड को जानना आवश्यक है जिसे प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Period) कहा जाता है। यह वह समय है जब मानव ने लेखन प्रणाली का आविष्कार नहीं किया था। लिखित स्रोतों के अभाव में इस काल का अध्ययन पुरातात्विक अवशेषों, औजारों, गुफा चित्रों, अस्थियों और स्थलों के आधार पर किया जाता है।
प्रागैतिहासिक काल मानव विकास का सबसे लंबा चरण है, जो लाखों वर्षों तक फैला हुआ है और जिसने सभ्यता की नींव रखी।
प्रागैतिहासिक काल की परिभाषा
"वह काल जब मानव ने लेखन प्रणाली का आविष्कार नहीं किया और जीवन मुख्यतः शिकार, संग्रहण तथा प्रारंभिक कृषि पर आधारित था, प्रागैतिहासिक काल कहलाता है।"
इसे अंग्रेज़ी में Prehistoric Age कहा जाता है।
प्रागैतिहासिक काल का वर्गीकरण
प्रागैतिहासिक काल को मुख्यतः औजारों और उपकरणों की निर्माण सामग्री के आधार पर विभाजित किया गया है।
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पाषाण युग (Stone Age)
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पुरापाषाण (Old Stone Age)
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मध्यपाषाण (Mesolithic Age)
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नवपाषाण (Neolithic Age)
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ताम्रपाषाण युग (Chalcolithic Age)
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लौह युग (Iron Age)
1. पाषाण युग (Stone Age)
(क) पुरापाषाण काल (Old Stone Age)
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समयावधि: लगभग 20 लाख वर्ष पूर्व से 10,000 ई.पू. तक।
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जीवन: मानव खानाबदोश था, गुफाओं या चट्टानों की ओट में रहता था।
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आजीविका: शिकार और खाद्य संग्रह (Hunting & Gathering)।
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औजार: मोटे और खुरदुरे पत्थरों से बने औजार।
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आग का प्रयोग: इसी काल में आग की खोज और उपयोग हुआ।
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प्रमुख स्थल:
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भारत में – भीमबेटका (म.प्र.), ज्वालापुरम् (आंध्र प्रदेश), बेलन घाटी (उत्तर प्रदेश)।
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विशेषता: मानव ने प्राकृतिक गुफाओं की दीवारों पर चित्रकारी की।
(ख) मध्यपाषाण काल (Mesolithic Age)
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समयावधि: लगभग 10,000 ई.पू. से 8,000 ई.पू.
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औजार: सूक्ष्म औजार (Microliths) – छोटे पत्थरों से बने तेज धार वाले उपकरण।
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आजीविका:
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आंशिक रूप से शिकार-संग्रह,
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आंशिक रूप से कृषि और पशुपालन की शुरुआत।
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कला: गुफा चित्रों में शिकार, नृत्य, और दैनिक जीवन का चित्रण।
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प्रमुख स्थल: आदमगढ़ (म.प्र.), बागोर (राजस्थान), लांगहनज (गुजरात)।
(ग) नवपाषाण काल (Neolithic Age)
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समयावधि: लगभग 8,000 ई.पू. से 3000 ई.पू.
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विशेषताएँ:
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कृषि और पशुपालन की शुरुआत।
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स्थायी निवास – मिट्टी और लकड़ी के मकान।
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पहिए का आविष्कार।
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बर्तन बनाने की शुरुआत।
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प्रमुख स्थल:
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ब्रह्मगिरि (कर्नाटक), चिरांद (बिहार), कोल्डिहवा (उत्तर प्रदेश), मेहरगढ़ (पाकिस्तान)।
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2. ताम्रपाषाण काल (Chalcolithic Age)
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समयावधि: लगभग 3000 ई.पू. से 1000 ई.पू.
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विशेषताएँ:
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सबसे पहले तांबे (Copper) का प्रयोग।
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कृषि का व्यापक प्रसार।
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मिट्टी और धातु के बर्तनों का उपयोग।
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मृतकों के साथ दफनाने की प्रथा।
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प्रमुख क्षेत्र:
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महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश।
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प्रमुख स्थल: कायथा (म.प्र.), इनामगाँव (महाराष्ट्र), आहड़ (राजस्थान)।
3. लौह युग (Iron Age)
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समयावधि: लगभग 1000 ई.पू. से आगे।
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विशेषताएँ:
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लोहे के औजारों का प्रयोग, खेती में क्रांति।
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नगरों और बस्तियों का विकास।
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लेखन प्रणाली और ऐतिहासिक काल की शुरुआत।
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प्रमुख स्थल: आत्रंजीखेड़ा (उत्तर प्रदेश), पांडुराजढ़ी (महाराष्ट्र)।
भारत के प्रागैतिहासिक स्थल
भारत में प्रागैतिहासिक काल के अनेक महत्वपूर्ण स्थल खोजे गए हैं:
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भीमबेटका (म.प्र.) – गुफा चित्रों के लिए प्रसिद्ध।
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मेहरगढ़ (पाकिस्तान) – नवपाषाण कालीन कृषि और पशुपालन के प्रमाण।
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ब्रह्मगिरि (कर्नाटक) – नवपाषाण और मेगालिथिक संस्कृति।
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ज्वालापुरम् (आंध्र प्रदेश) – पुरापाषाण काल।
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कोल्डिहवा (उत्तर प्रदेश) – नवपाषाण काल।
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बागोर (राजस्थान) – मध्यपाषाण संस्कृति।
प्रागैतिहासिक काल की कला
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गुफा चित्रकारी (Cave Paintings) – विशेषकर भीमबेटका।
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चित्रों में शिकार, पशु, नृत्य और दैनिक जीवन के दृश्य।
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रंग: लाल और हरे रंग (प्राकृतिक खनिजों से बने)।
अध्ययन के स्रोत
चूँकि इस काल में लेखन प्रणाली नहीं थी, इसलिए अध्ययन मुख्यतः निम्न स्रोतों पर आधारित है:
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पुरातात्विक अवशेष – औजार, हथियार, बर्तन।
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गुफा चित्र – जीवन शैली और सांस्कृतिक विकास।
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स्थलों की खुदाई – निवास, समाधि, कृषि उपकरण।
निष्कर्ष
प्रागैतिहासिक काल मानव सभ्यता की जड़ें है। इस काल में मानव ने गुफाओं से निकलकर स्थायी जीवन की ओर कदम बढ़ाया। शिकार-संग्रह से कृषि-पशुपालन तक की यात्रा ने मानव को आधुनिक सभ्यता की नींव रखने योग्य बना दिया।
भारत में भी इस काल के असंख्य पुरातात्विक स्थल हैं जो न केवल मानव विकास की कहानी बताते हैं बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि भारतीय उपमहाद्वीप विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं का उद्गम स्थल रहा है।
प्रागैतिहासिक काल से संबंधित सामान्य प्रश्न (FAQ)
प्रागैतिहासिक काल वह समय है जब मानव ने लेखन प्रणाली का आविष्कार नहीं किया था और जीवन शिकार, संग्रहण तथा प्रारंभिक कृषि पर आधारित था।
प्रागैतिहासिक काल को उपकरण बनाने की सामग्री के आधार पर विभाजित किया गया है – पाषाण युग, ताम्रपाषाण युग और लौह युग।
पाषाण युग तीन भागों में विभाजित है – पुरापाषाण (Old Stone Age), मध्यपाषाण (Mesolithic Age) और नवपाषाण (Neolithic Age)।
पुरापाषाण काल में मानव खानाबदोश था, गुफाओं में रहता था और जीवन शिकार व संग्रहण पर आधारित था। औजार मोटे पत्थरों से बने होते थे।
मध्यपाषाण काल में छोटे पत्थरों से बने सूक्ष्म औजार (Microliths) का उपयोग किया गया। इसी समय प्रारंभिक कृषि और पशुपालन की शुरुआत हुई।
नवपाषाण काल में कृषि और पशुपालन का आरंभ हुआ, स्थायी जीवन शुरू हुआ, पहिए का आविष्कार हुआ और मिट्टी के घर बनने लगे।
भारत के नवपाषाण स्थलों में ब्रह्मगिरि (कर्नाटक), चिरांद (बिहार), कोल्डिहवा (उत्तर प्रदेश) और मेहरगढ़ (पाकिस्तान) प्रमुख हैं।
ताम्रपाषाण काल में सबसे पहले तांबे का प्रयोग हुआ। कृषि का प्रसार हुआ और धातु व मिट्टी के बर्तनों का उपयोग बढ़ा।
भारत में लौह युग लगभग 1000 ई.पू. से शुरू हुआ। इसी काल में लोहे के औजारों का प्रयोग बढ़ा और नगरों का विकास हुआ।
इस काल का अध्ययन पुरातात्विक अवशेषों (औजार, हथियार, बर्तन), गुफा चित्रों और खुदाई में मिले स्थलों के आधार पर किया जाता है।